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बुधवार, दिसंबर 14, 2011

श्री रामकृष्ण - ( हँसते हुए) - एक आदमी बगल में चटाई लेकर नाटक देखने गया था। नाटक शुरू होने में देर थी, इसलिए वह चटाई बिछा कर सो गया। जब जागा तब तक सब समाप्त हो गया था। ( सब हँसते है।)



फिर चटाई बगल में दबा कर वापस लौट आया।



-श्री रामकृष्ण वचनामृत से