Apka Swagat hai !
सुनो रहीम !
"प्रेम का धागा "
अब कहाँ है
स्वार्थ की डोर से
बंधे हुए रिश्ते
बनते और बिगड़ते हैं
सुविधानुसार
टूट जाते हैं
और फिर जुड़ जाते हैं
बिना किसी गाँठ के !
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