Apka Swagat hai !
चित्र चुप रहेंगे
जिनकी देहाती गंध
आयु के चौथे प्रहर में
पुत्र के निकट
न फटक सकी ,
उन्ही जनक-जननी के
भव्य रंगीन चित्र
अब, बंगले के सुगन्धित पूजा कक्ष में
टंगे हुए हैं
ईश्वर के साथ
क्योंकि , अब वे चुप हैं
और चुप ही रहेंगे सदैव
ईश्वर की तरह !
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