श्री रामकृष्ण - ".......... शास्त्रों में उनके पाने के उपायों की ही बातें मिलेगी। परन्तु ख़बरें लेकर काम करना चाहिए। तभी तो वस्तु लाभ होगा। केवल पांडित्य से क्या होगा ? बहुत से श्लोक और बहुत से शास्त्र पंडितों के समझे हुए हो सकते हैं, परन्तु संसार पर जिसकी आसक्ति है, मन ही मन कामिनी और कंचन पर जिसका प्यार है, शास्त्रों पर उसकी धारणा नहीं हुई- उसका पढना व्यर्थ है। पंचांग में लिखा है कि इस साल वर्षा खूब होगी, परन्तु पंचांग को दाबने पर एक बूँद भी पानी नहीं निकलता, भला एक बूँद भी तो गिरता, परन्तु उतना भी नहीं गिरता ! " ( सब हँसते हैं।)
- श्रीरामकृष्ण वचनामृत से
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