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बुधवार, फ़रवरी 08, 2012



यदु बाबु कह रहे हैं, पधारिये , पधारिये। आपस में कुशल प्रश्न के बाद श्रीरामकृष्ण बातचीत कर रहे हैं।

श्री रामकृष्ण ( हँसकर) - तुम इतने चापलूसों को क्यों रखते हो ?

यदु ( हँसते हुए) - इसलिए कि आप उनका उध्दार करें। ( सभी हँसने लगे।)

श्रीरामकृष्ण - चापलूस लोग समझते हैं की बाबू उन्हें खुले हाथ धन देंगे; परन्तु बाबू से धन निकालना बड़ा कठिन काम है । एक सियार एक बैल को देख उसका फिर साथ न छोड़े। बैल चरता फिरता है, सियार भी साथ साथ है। सियार ने समझा कि बैल का जो अंडकोष लटक रहा है, वह कभी न कभी गिरेगा और वह उसे खायेगा! बैल कभी सोता है तो वह भी उसके पास ही लेटकर सो जाता है और फिर जब बैल उठकर घूम-फिर कर चरता है तो वह भी साथ-साथ रहता है। कितने ही दिन इस प्रकार बीते, परन्तु वह कोष नहीं गिरा, तब सियार निराश होकर चला गया ! ( सभी हँसने लगे ।) इन चापलूसों की ऐसी ही दशा है !

- श्रीरामकृष्ण वचनामृत से

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