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गुरुवार, फ़रवरी 02, 2012

श्री रामकृष्ण - " ...........मेरी अब वह अवस्था नहीं है। हनुमान ने कहा था - वार, तिथि, नक्षत्र, इतना सब मैं नहीं जानता, मैं तो बस श्रीरामचंद्र जी की चिंता किया करता हूँ। ....राम और लक्ष्मण जब पम्पा सरोवर पर गए, तब लक्ष्मण ने देखा, एक कौआ व्याकुल होकर बार बार पानी पीने के लिए जा रहा था, परन्तु पीता न था। राम से पूछने पर उन्होंने कहा, ' भाई, यह कौआ परम भक्त है। दिन रात यह राम नाम जप रहा है। इधर प्यास के मारे छाती फटी जा रही है, परन्तु सोचता है, पानी पीने लगूंगा तो जप छूट जायेगा।' मैंने पूर्णिमा के दिन हलधारी से पूछा, ' दादा, आज क्या अमावस है ? ' ( सब हंसते हैं।)


(सहास्य) हाँ, यह सत्य है। ज्ञानी पुरुष की पहचान यह है कि पूर्णिमा और अमावस में भेद नहीं पाता। परन्तु हलधारी को इस विषय में कौन समझा सकता था, वो कहता, देखो, ये पूर्णिमा और अमावस में भेद नहीं कर सकते और लोग इनको इतना मानते हैं !


- श्रीरामकृष्ण वचनामृत

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