श्री रामकृष्ण ( गिरीश से) - ईश्वर की सब धारणा कर भी कौन सकता है ? न उनका कोई बड़ा अंश, न कोई छोटा अंश संपूर्ण धारणा में लाया जा सकता है; और संपूर्ण धारणा करने की जरुरत ही क्या है ? उन्हें प्रत्यक्ष कर लेने ही से काम बन गया। उनके अवतार को देखने से ही उनको देखना हो गया। अगर कोई गंगाजी के पास जाकर गंगा जल का स्पर्श करता है तो वह कहता है, मैं गंगाजी के दर्शन कर आया। उसे हरिद्वार से गंगासागर तक की गंगा का स्पर्श नहीं करना पड़ता। ( सब हँसते हैं।)
- श्रीरामकृष्ण वचनामृत से
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें