पल्टू और विनोद सामने बैठे हुए हैं।
श्री रामकृष्ण (पल्टू से, सहास्य ) - तू ने अपने बाप से क्या कहा ? ( मास्टर से) सुना, इसने यहाँ आने की बात पर अपने बाप को भी जवाब दे दिया। ( पल्टू से) क्यों रे, क्या कहा ?
पल्टू - मैंने कहा, हाँ, मैं उनके पास जाया करता हूँ, तो यह कौनसा बुरा काम है ? ( श्री रामकृष्ण और मास्टर हँसे।) अगर जरुरत होगी तो और भी इसी तरह की सुनाऊंगा।
श्री रामकृष्ण ( सहास्य, मास्टर से) - नहीं, क्यों जी, इतनी भी कहीं, बढा-चढी होती है ?
मास्टर - जी नहीं, इतनी बढा -चढी अच्छी नहीं।
( श्री रामकृष्ण हँसतेहैं।)
- श्रीरामकृष्ण वचनामृत से
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