भोर
पक्षी चहके
भंवरे बहके
कुछ फूल खिले
कलियाँ डोली !
प्रातः की स्वर्ण
रश्मियों ने जब
अंगड़ाई ली
अँखियाँ खोली !
अलसाई तितली
ले पराग फूलों का
इधर उधर डोली !
और शांत झील की
लहरों ने
नीले जल से
अँखियाँ धो ली !
कुछ धूल उडी
पगडण्डी पर
बैलों की घंटियाँ बोली !
आराध्य की
अर्चना हुई
माला चन्दन
अक्षत रोली !
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