यह ब्लॉग खोजें

मंगलवार, अक्टूबर 25, 2011

****



यह संसार हमारे मनोभावों का प्रतिबिम्ब है !



****



धन्य है वह झांझावत जो हमें प्रभु के संसर्ग में लाकर खड़ा कर देता है !



****



ईश चिंतन को सांसारिक असावधानी का बहाना नहीं बनाया जा सकता !



****

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें