****
अंजुरी में सूरज को भरकर
अर्पित कर दूँ उन लोगों पर
जिनकी द्र्ष्टी का सूरज से
टूट गया कब का नाता है
भूल गए वे क्या प्रकाश है
उन्हें तमस ही अब भाता है
जान ही लेंगे वे सूरज को
होंगे स्वागत को तत्पर
भूल अन्धेरे के दुर्दिन
आ जायेंगे ज्योति पथ पर
अंजुरी में सूरज .........................
*******
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें