तितली का स्कूल
हवा थपकियाँ देकर -
माँ कि जैसे
मुझको सुला रही है !
नदिया कलकल बहकर जैसे
मुझको लोरी सुना रही है !
धरती कि गोदी में सोकर
बदल का अंचल ओड़ा है !
और अचेतन मन ने
प्यारे सपनों से नाता जोड़ा है!
सुबह हुई कोयल ने लम्बी
कूक लगाकर मुझे उठाया !
शुरू हुआ चिड़ियों का कलरव
सबने भानु को शीश झुकाया!
किरणों ने गुदगुदी मचाई
कलियाँ हंसकर फूल बन गई !
खिली हुई ये सारी कलियाँ
तितली का स्कूल बन गई !!
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