::माँ कहती है ::
माँ कहती है
'स्वेटर पहन'
वो क्या जाने
सर्दी मेरी सखी
झूम गलबहियां डाले
कैसी सुखद झुरझुरी
तन को दे जाती है !
माँ कहती है
'नीचे आ'
वो क्या जाने
जाने किस किस को छूकर
आई हुई हवा
मन को कितना भाती है !
माँ कहती है
'चुप भी कर '
वो सब जाने
बिटिया उसकी
बड़ी हुई जाती है !!
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