यह ब्लॉग खोजें

शुक्रवार, अक्टूबर 28, 2011

::माँ कहती है ::





माँ कहती है


'स्वेटर पहन'


वो क्या जाने


सर्दी मेरी सखी


झूम गलबहियां डाले


कैसी सुखद झुरझुरी


तन को दे जाती है !


माँ कहती है


'नीचे आ'


वो क्या जाने


जाने किस किस को छूकर


आई हुई हवा


मन को कितना भाती है !


माँ कहती है


'चुप भी कर '


वो सब जाने


बिटिया उसकी


बड़ी हुई जाती है !!


******

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें