यह ब्लॉग खोजें

बुधवार, नवंबर 09, 2011

चलती चक्की देख के

दिया कबीरा ऱोय।

दो पाटन के बीच में

साबुत बचा न कोय॥


" यह संसार चक्की है और चक्की जिस के सहारे और जिसके चारों तरफ घूम रही है वह केंद्र बिंदु है, भक्त जिसे भगवान कहते है और ज्ञानी जिसे परमात्मा कहते हैं । तो इस चक्की में वे दाने जो केंद्र का आश्रय ले लेते हैं, उसकी शरण में चले जाते हैं , वे पिसने से बच जाते हैं। संसार रूपी चक्की में पिसने से बचना हो तो उनका आश्रय लो, उनकी शरण में चले जाओ।" ------------रामकृष्ण परमहंस देव

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें