14.3.1996
" सुखी कौन ?" मैं चारो दिशाओं में पूछता हूँ, पर मेरी ही आवाज की प्रतिध्वनियाँ संसार कूप से लौट कर मुझसे ही पूछने लगती है, "सुखी कौन ?" " सुखी कौन ?"
असंख्य पथ , दो व्यक्तियों के लिए समान राहें कैसे हो सकती है। सुखद परिस्थितियों की प्रतीक्षा मत करो मेरे भाई , इस मरीचिका ने किसको नहीं छला।
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