श्री रामकृष्ण- हाँ , कई स्थान देखे हैं। (सहास्य ) हाजरा बहुत दूर तक गया है और बहुत ऊँचे तक चढ़ गया था , हृषिकेश तक हो आया है। ( सबका हँसना। ) मै इतनी दूर तक नहीं जा सका, इतने ऊँचे नहीं चढ़ा।
गिद्ध भी बहुत ऊँचे चढ़ जाता है। परन्तु उसकी दृष्टि मरघट पर ही रहती है। ( सब हंसते हैं।) मरघट का क्या अर्थ है जानते हो ? मरघट अर्थात कामिनी -कांचन।
-रामकृष्ण वचनामृत से
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें