एक जगह नाटक हो रहा था । एक आदमी को बैठकर सुनने की बड़ी इच्छा थी। उसने झांककर देखा, तो मालूम हुआ कि यदि कोई बैठकर देखना चाहता है तो उससे टिकिट के दाम लिए जाते हैं , फिर क्या था , वहां से चलता बना। एक दूसरी जगह नाटक हो रहा था , वह वहां गया। पूछने पर मालूम हुआ, वहां टिकिट नहीं लगता । वहां बड़ी भीड़ थी। वह दोनों हाथों से भीड़ को हटाकर बीच महफ़िल में पहुंचा। वहां अच्छी तरह जमकर मूंछों पर ताव दे देकर सुनने लगा। (सब हँसते हैं)
- श्री रामकृष्ण वचनामृत से
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