श्री रामकृष्ण- उसकी ( नारायण की) माँ उस दिन आई थी। अभिमानिनी थी, देख कर भय हुआ। ...मुझसे कहा, 'आप नारायण से कहिये जिससे विवाह करे।' इस बात पर मैंने कहा, ये सब भाग्य की बातें हैं। क्यों मैं ऐसी बात के लिए जोर दूँ ? ( सब हंसते हैं)
"नारायण अच्छी तरह पढने में जी नहीं लगाता, इस पर उसने कहा ,आप कहिये, जरा अच्छी तरह पढे। मैंने कहा, पढना रे ! तब उसने कहा , 'जरा अच्छी तरह कहिये।' ( सब हंसते हैं)
- रामकृष्ण वचनामृत से
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