मिठाई पा चुकने के बाद आप हँसते हुए विद्यासागर से बातचीत कर रहे हैं।
( स्थान: ईश्वरचंद्र विद्यासागर का घर )
श्री रामकृष्ण - "आज सागर से आ मिला। इतने दिन खाई, सोता और अधिक से अधिक हुआ तो नदी देखी, पर अब 'सागर' देख रहा हूँ।" ( सब हँसते हैं।)
विद्यासागर- ' तो थोडा खारा पानी लेते जाइये।' (हास्य)
श्री रामकृष्ण - "नहीं जी, खारा पानी क्यों ? तुम तो अविद्या के सागर नहीं विद्या के सागर हो। ( सब हँसे।)
तुम क्षीर समुद्र हो।" ( सब हँसे।)
- श्री रामकृष्ण वचनामृत से
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