यह ब्लॉग खोजें

मंगलवार, दिसंबर 20, 2011

श्री रामकृष्ण मिठाई के ताक के पास खड़े हैं। बलराम और मास्टर कलकत्ता से एक ही गाड़ी से चढ़ कर आये हैं और प्रणाम कर रहे हैं। प्रणाम करके बैठने पर श्री रामकृष्ण हंसते हुए कहने लगे, " ताक पर से कुछ मिठाई लेने गया था कि एक छिपकली बोल उठी, तुरंत हाथ हटा लिया! ( सब हँसे।)


यह सब मानना चाहिए। देखो न राखाल बीमार पड़ गया ; मेरे भी हाथ पैर में दर्द हो रहा है। क्या हुआ, सुनो। सुबह को मैंने उठते ही , राखाल आ रहा है सोच के अमुक का मुख देख लिया था। ( सब हँसते हैं।)




-रामकृष्ण वचनामृत से

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें