श्री रामकृष्ण - "....मान लिया कि नाम से जीव एक बार शुद्ध हुआ, पर वह फिर तरह तरह के पापों में लिप्त हो जाता है। मन में बल नहीं; वह प्रण नहीं करता कि फिर पाप नहीं करूँगा। गंगा स्नान से सब पाप मिट जाते हैं सही, पर सब लोग कहते हैं कि वे पाप एक पेड़ पर चढ़े रहते हैं। जब वह मनुष्य गंगाजी से नहा कर लौटता है, तो वे पुराने पाप पेड़ पर से कूद कर फिर उसके सिर पर सवार हो जाते हैं।" ( सब हँसे। )
-रामकृष्ण वचनामृत से
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