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शुक्रवार, दिसंबर 16, 2011

बलराम - " अब विश्वास बाबू की साधू संग करने की इच्छा है।


श्री रामकृष्ण -( हंसते हुए ) - " साधू का कमण्डलु चार धाम घूमकर आता है, परन्तु वैसा ही कडुआ का कडुआ रहता है। मलय की हवा जिन पेड़ो लगती है वे चन्दन हो जाते हैं, परन्तु सेमल , बड़ आदि चन्दन नहीं बनते ! कोई कोई साधू संग करते हैं गांजा पीने के लिए ! ( हंसी) साधू लोग गांजा पीते हैं इसीलिए उनके पास आकर बैठते हैं, गांजा तैयार कर देतें हैं और प्रसाद पाते हैं ! ( सब हंसते हैं। )




- श्री रामकृष्ण वचनामृत से

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