श्री रामकृष्ण - ........बहुत कुछ बात होने के बाद देवेन्द्र ( देवेन्द्र नाथ ठाकुर ) ने खुश होकर कहा- आपको उत्सव में आना होगा।'
मैंने कहा, ' वह ईश्वर कि इच्छा ; मेरी यह अवस्था तो देख ही रहे हो- वे कभी किसी भाव में रखते हैं , कभी किसी भाव में। '
देवेन्द्र ने कहा - 'नहीं आना ही होगा। परन्तु धोती और चद्दर ये दोनों कपडे आप जरुर पहने हुए हो, आपको उलजलूल देख कर किसी ने कुछ कह दिया तो मुझे बड़ा कष्ट होगा।'
मैंने कहा , ' यह मुझसे न होगा। मैं बाबू न बन सकूँगा।' देवेन्द्र और सेजो बाबु हँसने लगे।
उसके दूसरे ही दिन सेजो बाबू के पास देवेन्द्र की चिट्ठी आई- मुझे उत्सव देखने के लिए जाने से उन्होंने रोका था। लिखा था, ' देह पर एक चद्दर भी न रहेगी तो असभ्यता होगी।' ( सब हंसते हैं।)
- श्री रामकृष्ण वचनामृत से
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