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बुधवार, दिसंबर 14, 2011

श्री रामकृष्ण - ( केशव चन्द्र सेन से , केशव के घर पर ) - ".......तुम सोचते हो कि बस, सब मामला तय है। परन्तु जब तक रोग की कुछ कसर रहेगी, तब तक वे तुम्हे नहीं छोड़ सकते। अगर तुम अस्पताल में नाम लिखाओ तो तुम्हे चले आने का अधिकार नहीं है। जब तक रोग में कोई त्रुटि पाई जाएगी तब तक डाक्टर साहब तुम्हे आने नहीं देंगे। तुमने नाम क्यों लिखाया ? " ( सब हंसते हैं। )

गंभीर भाव से ये बातें कह कर श्री रामकृष्ण फिर बालक की तरह हंसने लगे। केशव से कह रहे हैं ,' देखूं , तुम्हारा हाथ देखूं। बालक की तरह हाथ लेकर मानो तौल रहे हैं। अंत में कहने लगे, " नहीं, तुम्हारा हाथ हल्का है, खलों का हाथ भारी होता है।" ( सब हँसते हैं।)



- श्री रामकृष्ण वचनामृत से

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