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मंगलवार, दिसंबर 20, 2011

मास्टर को कमरे में घुसता देख श्री रामकृष्ण ने हँसते हुए कहा, " यह देखो, फिर आया।" सब हंसने लगे।

मास्टर ने भूमिष्ठ होकर प्रणाम करके आसन ग्रहण किया। ...श्री रामकृष्ण नरेन्द्र आदि भक्तों से कहने लगे,

" देखो, एक मोर को किसी ने चार बजे अफीम खिला दी। दूसरे दिन से वह अफीमची मोर ठीक चार बजे आ जाता था ! यह भी अपने समय पर आया है।" सब लोग हंसने लगे।


-रामकृष्ण वचनामृत से

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