श्री रामकृष्ण -( किशोर भक्तों से )- "तुम लोग त्रैलोक्य की पुस्तक -भक्ति चैतन्य चन्द्रिका- पढना उससे एक किताब मांग लेना। उसमे चैतन्य की बड़ी अच्छी बातें लिखी है। " एक भक्त - " क्या वे देंगे ?" श्री रामकृष्ण - (सहास्य)- "क्यों, खेत में अगर बहुत सी ककड़ियाँ हुई हो, तो मालिक दो तीन मुफ्त ही दे सकता है। ( सब हंसते हैं। ) मुफ्त देगा क्यों नहीं, तू कहता क्या है । ( हास्य )
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