यह ब्लॉग खोजें

बुधवार, दिसंबर 21, 2011

श्री रामकृष्ण -( किशोर भक्तों से )- "तुम लोग त्रैलोक्य की पुस्तक -भक्ति चैतन्य चन्द्रिका- पढना उससे एक किताब मांग लेना। उसमे चैतन्य की बड़ी अच्छी बातें लिखी है। "
एक भक्त - " क्या वे देंगे ?"
श्री रामकृष्ण - (सहास्य)- "क्यों, खेत में अगर बहुत सी ककड़ियाँ हुई हो, तो मालिक दो तीन मुफ्त ही दे सकता है। ( सब हंसते हैं। ) मुफ्त देगा क्यों नहीं, तू कहता क्या है । ( हास्य )



- श्री रामकृष्ण वचनामृत से

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें