गिरीश - ( सहास्य डॉक्टर से ) - आप तीन - चार घंटे से यहाँ है, रोगियों की चिकित्सा के लिए न जाइएगा ?
डॉक्टर - कहाँ रही डॉक्टरी और कहाँ रहे रोगी ! ऐसे परमहंस से पाला पड़ा है कि मेरा तो सर्वस्व ही स्वाहा हुआ ! ( सब हँसे)
श्री रामकृष्ण - देखो, कर्मनाशा नाम की एक नदी है। उस नदी में डुबकी लगाना एक महा-विपत्ति है । इससे कर्मों का नाश हो जाता है। फिर वह मनुष्य कोई काम नहीं कर सकता। ( डॉक्टर आदि सब हंसते हैं।)
- श्री रामकृष्ण वचनामृत से
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