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शुक्रवार, जनवरी 06, 2012

गिरीश - ( सहास्य डॉक्टर से ) - आप तीन - चार घंटे से यहाँ है, रोगियों की चिकित्सा के लिए न जाइएगा ?


डॉक्टर - कहाँ रही डॉक्टरी और कहाँ रहे रोगी ! ऐसे परमहंस से पाला पड़ा है कि मेरा तो सर्वस्व ही स्वाहा हुआ ! ( सब हँसे)


श्री रामकृष्ण - देखो, कर्मनाशा नाम की एक नदी है। उस नदी में डुबकी लगाना एक महा-विपत्ति है । इससे कर्मों का नाश हो जाता है। फिर वह मनुष्य कोई काम नहीं कर सकता। ( डॉक्टर आदि सब हंसते हैं।)



- श्री रामकृष्ण वचनामृत से

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