(सुरेन्द्र के बगीचे में ) समय बहुत हो गया है, परन्तु भोजन अदि का बंदोबस्त अभी तक नहीं हुआ। श्री रामकृष्ण बालक स्वभाव है। कहा, " क्यों जी , अभी तक कुछ देता क्यों नहीं ? नरेन्द्र कहाँ है ?
एक भक्त - ( श्री रामकृष्ण के प्रति सहास्य)- महाराज, अध्यक्ष रामबाबू है, वे ही सब देखभाल करते हैं। ( सब हंसते हैं।)
श्री रामकृष्ण - ( हंसते हुए) - राम अध्यक्ष है; तब तो हो चुका !
एक भक्त - जी रामबाबू जहाँ अध्यक्ष होते हैं, वहां प्राय: यहीं हाल हुआ करता है ! ( सब हंसते हैं।)
- श्रीरामकृष्ण वचनामृत से
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें