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मंगलवार, जनवरी 03, 2012

२५.४.१९९५
' .....बाकी तो जिंदगी की पाठशाला और समय नाम के मास्टरजी ; कब बाज को घोंघा बना दे और कब मोती कोयला हो जाये, कुछ पता नहीं। ...'

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