श्री रामकृष्ण - सभी मनुष्य दिखने में एक सरीखे हैं, पर हर एक का स्वभाव भिन्न है। किसी के भीतर सत्त्व गुण अधिक है, किसी के भीतर रजोगुण तो किसी के भीतर तमोगुण। गुझिया बाहर से एक जैसी दिखाई देती है पर किसी के भीतर खोया, किसी के भीतर नारियल तो किसी के भीतर उड़द की दाल होती है। ( सब हंसते हैं।) - श्रीरामकृष्ण वचनामृत से
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