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शुक्रवार, जनवरी 06, 2012

श्री रामकृष्ण-( महिम से ) - मैंने गिरीश से तुम्हारे बारे में बातचीत की थी। वह बहुत गहरा है, तुम सिर्फ घुटने तक हो। अच्छा , देखे तो भला जो मैंने कहा है वह ठीक है या नहीं। मैं चाहता हूँ कि तुम दोनों में बहस हो। पर देखो आपस में समझौता न कर लेना ( सब हंसते हैं।)




-रामकृष्ण वचनामृत से

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