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बुधवार, जनवरी 11, 2012

मुख़र्जी - (हाजरा से )- आपने इनके पास से बहुत कुछ सीखा है।

श्री रामकृष्ण ( सहास्य)- नहीं, बचपन से ही इनकी यह अवस्था है । ( सब हंसते हैं ।)

- श्रीरामकृष्ण वचनामृत से


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