श्री रामकृष्ण चैतन्य लीला देखने जायेंगे, इसी सम्बन्ध में बातचीत हो रही है।
श्री रामकृष्ण ( हंसते हुए) - "यदु ने कहा था ,' एक रूपये वाली जगह से खूब दिख पड़ता है और सस्ता भी है !' "
" एक बार हम लोगों को पेनेटी ले जाने की बात हुई थी, यदु ने हम लोगों के चढ़ने के लिए चलती नाव किराये पर लेने की बातचीत की थी !" ( सब हंसते हैं।)
" बड़ा हिसाबी है। जाने के साथ ही उसने पूछा , 'कितना किराया है ?' मैंने कहा, ' तुम्हारा न सुनना ही अच्छा है, तुम ढाई रूपये देना।' इससे चुप हो गया और वहीँ ढाई रूपये देता है। ( सब हंसते हैं।)
- श्रीरामकृष्ण वचनामृत से
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