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शुक्रवार, जनवरी 27, 2012

श्री रामकृष्ण - " .... सुना है कि श्रीमद्भाग्वद जैसे ग्रन्थ में भी इस तरह की बातें है। 'केशव का मंत्र बिना लिए भव सागर पार जाना कुत्ते की पूंछ पकड़ कर महासमुद्र पार करना है।' भिन्न भिन्न मत वालों ने अपने ही मत को प्रधान बतलाया है।


" शाक्त भी वैष्णवों को छोटा सिद्ध करने कि चेष्टा करते हैं। श्री कृष्ण भव नदी के नाविक है, पार कर देते हैं, इस पर शाक्त लोग कहते हैं - 'हाँ, यह बिलकुल ठीक है, क्योंकि हमारी माँ राजराजेश्वरी है, भला वे कभी खुद आकर पार कर सकती है " - कृष्ण को पार करने के लिए नौकर रख लिया है। '


( सब हंसते हैं।)

- श्रीरामकृष्ण वचनामृत से

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