श्री रामकृष्ण ( विद्यासागर से, सहास्य ) - यह सब जो कहा, वह तो ऐसे ही कहा। आप सब जानते हैं, किन्तु अभी आपको इसकी खबर नहीं। ( सब हँसे।) वरुण के भंडार में कितने ही रत्न पड़े हैं, परन्तु वरुण महाराज को कोई खबर नहीं।
विद्यासागर ( हंसते हुए)- यह आप कह सकते हैं।
श्री रामकृष्ण - (सहास्य)- हाँ जी, अनेक बाबू नौकरों के नाम तक नहीं जानते ! ( सब हंसते हैं।) घर में कहाँ कौनसी कीमती चीज पड़ी है, वे नहीं जानते ।
वार्तालाप सुनकर लोग आनंदित हो रहे हैं।
- श्रीरामकृष्ण वचनामृत से
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