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बुधवार, जनवरी 11, 2012

महिमाचरण - (श्री रामकृष्ण से सहास्य) - महाराज, आपसे एक निवेदन है, आपने हाजरा को घर जाने के लिए क्यों कहा ? फिर से संसार में जाने की उसकी इच्छा नहीं है।

श्री रामकृष्ण - उसकी माँ रामलाल के पास बहुत रोई है। इसीलिए मैंने कहा, तीन ही दिन के लिए चले जाओ, एक बार मिलकर फिर चले आना। माता को कष्ट देकर क्या कभी ईश्वर की साधना होती है ? संसार में जाते हुए ज्ञानी को क्या डर है ?

महिमाचरण - (सहास्य)- महाराज, हाजरा को ज्ञान जब हो तब न !

श्री रामकृष्ण (सहास्य) - हाजरा को सब कुछ हो गया है। संसार में थोडा सा मन है, कारण, बच्चे आदि है , और कुछ ऋण है। मामी की सब बीमारी अच्छी हो गयी है, एक नासूर रोग है ! ( महिमाचरण आदि सब हंसते हैं।)

- श्रीरामकृष्ण वचनामृत से

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